महात्मा बुुद्ध और अंगुलीमाल की कहानी
महात्मा बुुद्ध और अंगुलीमाल की कहानी
सत्संग पाकर दुष्ट आदमी इस तरह सुधर जाते हैं जिस तरह पारस से लोहा सुंदर सोना हो जाता है इस कलिकाल में भगवान महात्मा बुध हुए ,ढाई हजारों वर्ष से भी कुछ अधिक ही हुए । उनके समय में एक ब्राह्मण पुत्र था । उसको गुरु ने दक्षिणा में 1000 आदमियों को मारने के लिए कहा था । गुरु के मन में कुछ संदेह हो गया था, इसलिए उसने ऐसी दक्षिणा मांगी थी कि जिस से अनेकों को यह मारेगा तो इसको भी कोई मार देगा। इसलिए यह ब्राह्मण पुत्र गुरु की आज्ञा से लोगों को मारकर उंगलियों की माला बना लेता था। डाकू अंगुलिमाल मगध राज्य के जंगलों में रहता था। लोगों को लूटना और उनको जान से मार देना उसका काम था। व्यक्ति को भी मार कर उसकी एक ऊंगली काटकर उसकी माला बनाकर पहन लेता था, जिससे उसका नाम अंगुलिमाल हो गया। डाकू ने एक हज़ार अंगुलियां पहनने की कसम खाई थी।इसलिए उसका नाम ही 'अंगुलिमाल' हो गया था । उसके चलते लोगों में आतंक फैल गया, हाहाकार मच गया। सैकड़ों लोगों को उसने मारा। भगवान बुद्ध को जब यह सूचना मिली कि 'अंगुलिमाल' नामक हत्यारा बड़ी निर्ममता से लोगों की हत्या कर रहा है , तो वे उसकी ओर चल पड़े। लोगों ने बहुत मना किया कि भगवान् । उस और मत जाइए अंगुलिमाल बड़ा निर्मम हत्यारा है। वह आप पर भी प्रहार कर सकता है। भगवान ने किसी की बात नहीं सुनी, सीधे अंगुलिमाल की ओर चलते रहे। जब उंगली माल ने भगवान बुद्ध को अपनी ओर आते देखा। (जंगल के बीच मचान पर बैठे अंगुलिमाल ने बुद्ध को देखा और मचान से उतरकर, हाथ में तलवार लेकर बुद्ध की तरफ भागा)। तो जोर से भगवान को कहने लगा- "तू कौन है, ठहरो।" तो भगवान ने कहा मैं तो ठहरा हूं, तुम ठहरो। भगवान बुद्ध धीरे धीरे चल रहे थे और उंगली माल तेजी से उनको पकड़ने के लिए दौड़ रहा था फिर भी वह उनकी पकड़ में नहीं आ रहे थे अंगुलिमाल दौड़कर चलती हुई रध को और घोड़ों को पकड़ लेता था, लेकिन फिर भी वह महात्मा बुध को नहीं पकड़ पा रहा था। जब वह थककर रुक गया तो भगवान ने उसको स्पर्श करते हुए कहा कि अरे! यह क्या करते हो? लोगों की निर्ममता पूर्वक क्यों हत्या कर रहे हो? भगवान् का उस पर इतना प्रभाव पड़ा है कि वह अपना हथियार फेंक कर भगवान के चरणों में गिर पड़ा। भगवान ने उसको समझाया तो उसे अपने कर्मों से घृणा हुई और वह सन्यासी बन गया।
अच्छे संग से बुरे लोग भी अच्छे होते हैं और बुरे संघ से अच्छे लोग भी बुरे हो जाते हैं इसलिए सत्संग अवश्य करो सत्संग से अच्छे लोगों का संगत होता है

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